आगरा के ताज महल को आपने जमी पर देखा होगा .लेकिन जरा इस ताज को भी देखो जो घर के उपर प्यार के अहसास को मुकाम तक पहुचाने की कोशिस कर रहा हे ये ताज की नक़ल बनावट से तो नहीं भावनाओ से जरूर शहाजहा के ताज को चिड़ा रही है महज एक लाख रूपये और एक साल की मेहनत से बने इस ताज के पीछे भी मोहब्बत की कसिस और महबूबा से किया वादा निभाने की ललक है कहानी हिंदी फिल्मो की तरह है मुरादाबाद के कुन्दरकी छेत्र मे रहने वाले छिंदा खंड सारी पत्नी के साथ आगरा घुमने गए मोहब्बत के ताज को देख पत्नी का मन भी प्यार मे मचल बैठा । पति से पूछ बैठी मेरे लिए क्या बनाओगेछीदा के सामने ताज था कह दिया ताज बनाऊंगा पत्नी ख़ुस हुई और पति पर विस्वास के साथ वापस लोट आई एक दिन वही पत्नी दुनिया से गुजर गयी बात १९६० की है छीदा को वादा यादआया पहले जमीन खरीदी फिर बदायु से कारीगर बुलाये गए और बन गया १ और ताजमुमताज और शहजाह की मोहब्बत बड़े लोगो की हाई प्रोफाइल स्टोरी की तरह थी इस लिए aam logo की जुबान पर चिपक गयी छीदा और उनकी पत्नी छोटी की मोहब्बत आज भी जिन्दा है लेकिन आम आदमी को क्या अधिकार की मोहब्बत मे वो ताज की बराबरी करे? नतीजा सामने है कभी अरमानो की चादर लीये वादे को निभाने की इस ईमारत को खड़े रहने के लिए संघर्स करना par रहा है।
भुवन चन्द्र
मुरादाबाद
९४१२९-२१२७१
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